भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के साथ हिन्दी के प्रति सम्मान भी बढ़ा है : दिव्या माथुर
“घर केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक भावना है। भारत मुझे उतना ही अपना लगता है, जितना इंग्लैंड, डेनमार्क या स्वीडन। पूरी धरती ही मेरा घर है।” यह कहना है प्रतिष्ठित कथाकार व साहित्यिक संस्था वातायन की संस्थापक दिव्या माथुर का
