“जीवन में कितनी भी कड़वाहट आए, उससे अपने भीतर की मिठास कम नहीं होने देनी चाहिए। मेरे लिए सफलता का अर्थ केवल प्रसिद्धि या धन नहीं, बल्कि यह है कि मेरी कहानी पढ़कर कोई व्यक्ति मुस्कुरा सके, सुकून महसूस करे और थोड़ा-सा मजबूत बन जाए।” यह कहना था चर्चित लेखिका एवं फिल्म निर्माता इरा टाक का। वे प्रभा खेतान फाउंडेशन की साहित्यिक पहल कलम के अंतर्गत वी केयर एवं अहसास वूमेन के सहयोग से जयपुर में आयोजित आत्मीय संवाद में अपनी पुस्तक ‘पिकोलो फाइल्स’ और अपनी लेखन-यात्रा पर विचार साझा कर रही थीं। उन्होंने कहा, “कहानियाँ तितलियों की तरह होती हैं। उन्हें पकड़ा नहीं जा सकता; जब उनका मन होता है, वे स्वयं आपकी हथेली पर आकर बैठ जाती हैं।”

कार्यक्रम की शुरुआत प्रभा खेतान फाउंडेशन की राजस्थान एवं मध्य भारत मामलों की मानद संयोजक अपरा कुच्छल ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, फादर्स डे और विश्व संगीत दिवस की शुभकामनाओं के साथ की। उन्होंने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए लेखिका इरा टाक तथा संवादकर्ता शिप्रा शर्मा का परिचय कराया। संवाद के दौरान इरा टाक ने अपनी पुस्तक ‘पिकोलो फाइल्स’, लेखन-दृष्टि, पालतू साथियों के प्रति अपने भावनात्मक जुड़ाव और आगामी साहित्यिक परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। संवाद के उपरांत श्रोताओं ने भी उनसे प्रश्न पूछे और पुस्तक पर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर लेखिका प्रियंका जोधावत ने इरा टाक को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया, जबकि सुश्री अलका बत्रा ने संवादकर्ता शिप्रा शर्मा का सम्मान किया। कार्यक्रम के अंत में अपरा कुच्छल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।





कलम जयपुर का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा अहसास वूमेन एवं वी केयर के सक्रिय सहयोग से किया गया।










