“घर केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक भावना है। भारत मुझे उतना ही अपना लगता है, जितना इंग्लैंड, डेनमार्क या स्वीडन। पूरी धरती ही मेरा घर है।” यह कहना है प्रतिष्ठित कथाकार व साहित्यिक संस्था वातायन की संस्थापक दिव्या माथुर का, जिन्होंने प्रभा खेतान फाउंडेशन के जयपुर में आयोजित कलम में हिन्दी के वैश्विक स्वरूप तथा अपनी रचनात्मक यात्रा पर संवाद किया। संवादकर्ता थे प्रख्यात आलोचक डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल।
सत्र का आरम्भ अपरा कुच्छल, अहसास वूमेन एवं प्रभा खेतान फाउंडेशन की राजस्थान एवं मध्य भारत मामलों की मानद संयोजक, के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने प्रभा खेतान फाउंडेशन की साहित्यिक यात्रा और उसके विविध कार्यों की जानकारी दी।

अपरा कुच्छल ने लेखिका एवं संवादकर्ता डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल का परिचय देते हुए बताया कि दिव्या माथुर को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर तथा विश्व हिन्दी सचिवालय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनके चार कहानी-संग्रह, आठ उपन्यास, छह कविता-संग्रह तथा छह संपादित संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। वहीं, डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल के नाम एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं।
माथुर ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के साथ-साथ हिन्दी के प्रति सम्मान भी बढ़ा है। अब विदेशों में भारतीय गर्व से हिन्दी बोलते हैं और नई पीढ़ी भी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ रही है।

‘आत्महत्या से पहले’ जैसी कहानी ने उन्हें पहचान तो दिलाई, लेकिन उन्हें प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ा। परिणामस्वरूप, उन्होंने पंद्रह वर्षों तक लेखन से दूरी बना ली। लंदन जाने के बाद उन्हें भारतीय उच्चायोग और नेहरू सेंटर से जुड़ने का अवसर मिला। वहीं से उनके साहित्यिक जीवन का दूसरा चरण प्रारम्भ हुआ और सन् 1990 में उनका पहला कहानी-संग्रह ‘आक्रोश’ प्रकाशित हुआ।
दिव्या माथुर ने स्वीकार किया कि उनके उपन्यास ‘तिलिस्म’ ने पुरुषों के प्रति उनकी दृष्टि बदल दी। “उस प्रक्रिया ने मेरे भीतर वर्षों से जमा पुरुष-विरोध को समाप्त कर दिया।”
कार्यक्रम के अंत में प्रभा खेतान फाउंडेशन की राष्ट्रीय सलाहकार विन्नी कक्कड़ ने लेखिका दिव्या माथुर को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया, जबकि अहसास वूमेन, जयपुर की कुलसुम मलिक ने संवादकर्ता डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल का सम्मान किया। अंत में अपरा कुच्छल ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।





कलम का यह आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं अहसास वूमेन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। आयोजन में आईटीसी राजपुताना ने हॉस्पिटैलिटी पार्टनर तथा वीकेयर ने सहयोगी संस्था के रूप में सहभागिता निभाई।
