“राजनयिक होना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। मैं राजनयिक बनने के लिए इतनी व्याकुल थी कि मैंने कभी भी आईएएस को अपनी पहली पसंद नहीं बनाया। लेखक बनना भी मुझे उतना ही प्रिय है, जितना राजनयिक बनना।” यह कहना था भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की उपमहानिदेशक एवं चर्चित साहित्यकार अंजु रंजन का। वे प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘कलम’ सत्र में अपने राजनयिक और साहित्यिक जीवन के अनुभव साझा कर रही थीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अहसास वूमेन, कोलकाता की शेफाली रावत अगरवाल के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा साहित्य, कला, संस्कृति और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे सतत कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि फाउंडेशन साहित्यिक संवादों, पुस्तक लोकार्पण, सांस्कृतिक आयोजनों तथा कला-संबंधी गतिविधियों के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति को निरंतर मंच प्रदान कर रहा है।

अतिथि परिचय में बताया गया कि वर्ष 2002 बैच की भारतीय विदेश सेवा अधिकारी अंजु रंजन झारखंड के चतरा जिले से हैं। वे नेपाल, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण अफ्रीका में भारत की महावाणिज्यदूत के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुकी हैं तथा वर्तमान में आईसीसीआर में उपमहानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। राजनयिक होने के साथ-साथ वे एक चर्चित साहित्यकार भी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘प्रेम के विभिन्न अंग’, ‘विस्थापन और यादें’, ‘वो कागज़ की कश्ती’, ‘कोरोना के दौरान’, ‘एक राजनयिक की कोरोना डायरी’ तथा ‘शीतल धूप’ शामिल हैं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं मीडिया उद्यमी विश्वम्भर नेवर ने संवादकर्ता के रूप में किया।
संवाद के दौरान अंजु रंजन ने कहा, “मैंने कहानी, कविता और संस्मरण—तीनों विधाओं में लिखा है। मेरा मानना है कि कोई भी विधा एकांगी नहीं होती। जब भी आप कोई कविता लिखते या सोचते हैं, उसके पीछे कोई-न-कोई संस्मरण और कोई-न-कोई कहानी अवश्य होती है। मेरे विचार से ये तीनों विधाएँ किसी भी लेखक की लेखन-प्रक्रिया में समानांतर चलती हैं और उसकी अभिव्यक्ति को अधिक स्पष्टता तथा अधिक आयाम प्रदान करती हैं।”





उन्होंने अपने राजनयिक जीवन से जुड़े अनेक संस्मरण भी साझा किए। कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने उनसे विभिन्न विषयों पर प्रश्न किए, जिनका उन्होंने सहजता और आत्मीयता से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के अंत में अहसास वूमेन, कोलकाता की निलिशा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राज मिठौलिया ने अतिथियों को सम्मानस्वरूप पश्चिमी भारत की पारंपरिक कठपुतली स्मृति-चिह्न भेंट किया।
‘कलम’ का यह आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं अहसास वूमेन, कोलकाता के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। ताज़ा टीवी ने कार्यक्रम में सहयोगी संस्था के रूप में सहभागिता निभाई।










