प्रभा खेतान फाउंडेशन के ‘कलम’ कार्यक्रम का गुवाहाटी में आयोजन
दर्शकों को कमतर समझना फिल्म उद्योग की सबसे बड़ी भूल है : अनंत विजय

दर्शकों को कमतर समझना फिल्म उद्योग की सबसे बड़ी भूल है। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और चिंतक अनंत विजय का। वे गुवाहाटी में आयोजित प्रभा खेतान फाउंडेशन की साहित्यिक पहल ‘कलम’ के एक विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।

अपने वक्तव्य में उन्होंने भारतीय सिनेमा में कहानी कहने की परंपरा पर चर्चा करते हुए कहा कि सिनेमा का मूल उद्देश्य मनोरंजन है और दर्शक अंततः एक प्रभावशाली कहानी तथा भावनात्मक अनुभव की तलाश में सिनेमाघरों तक पहुँचते हैं। यदि कहानी में दम हो, तो दर्शक समय और धन दोनों निवेश करने के लिए तैयार रहते हैं।

गुवाहाटी में आयोजित ‘कलम’ के इस सत्र का शुभारंभ अहसास वूमेन, गुवाहाटी की प्रतिनिधि तनुश्री दत्ता गोगोई ने किया। उन्होंने प्रभा खेतान फाउंडेशन की गतिविधियों का परिचय देते हुए साहित्य, कला और सांस्कृतिक संवाद के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। 

अतिथि का परिचय करवाते हुए बताया गया कि अनंत विजय पत्रकारिता, साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में अपने व्यापक लेखन के लिए जाने जाते हैं। परिचय में उनकी प्रकाशित पुस्तकों तथा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (स्वर्ण कमल), गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार और कलिंगा लिटरेरी बुक अवार्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम में अनंत विजय से संवाद प्रतिष्ठित लेखिका, कवयित्री, अनुवादक और फिल्म समीक्षक अपराजिता पुजारी ने किया।

अनंत विजय कहा कि फिल्मकार अपने समय और समाज से प्रभावित होता है, किंतु अंततः किसी फिल्म की सफलता उसकी कहानी और प्रस्तुति पर निर्भर करती है। भारतीय सिनेमा के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने मदर इंडिया  जैसी फिल्मों को सांस्कृतिक और वैचारिक विमर्श का महत्वपूर्ण स्रोत बताया।

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्मों पर चर्चा करते हुए उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तक ‘ओटीटी का मायाजाल’ का संदर्भ दिया। उनके अनुसार ओटीटी ने भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय कथाओं को अभूतपूर्व वैश्विक पहुँच प्रदान की है। एआई और अनुवाद तकनीकों की सहायता से स्थानीय भाषाओं की सामग्री अब विश्वभर के दर्शकों तक पहुँच रही है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविध लोककथाएँ, सांस्कृतिक स्मृतियाँ और क्षेत्रीय कथाएँ हैं, जिन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक मंच मिल सकता है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ओटीटी अभी एक विकसित होता हुआ माध्यम है और इसके सामने जिम्मेदार सामग्री-निर्माण की चुनौती भी मौजूद है। उनके अनुसार भविष्य उन्हीं रचनाकारों का होगा जो मनोरंजन, संवेदनशीलता और सार्थक कथा-विन्यास के बीच संतुलन स्थापित कर सकेंगे।

कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका अनंत विजय ने विस्तार से उत्तर दिया। समापन सत्र में प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से अनंत विजय और अपराजिता पुजारी को उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक पारंपरिक नागा जनजातीय बाँस-निर्मित मुखौटे भेंट कर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रभा खेतान फाउंडेशन की पहल ‘कलम’ के प्रथम गुवाहाटी सत्र का आयोजन अहसास वूमेन, गुवाहाटी के सहयोग से विवांता गुवाहाटी में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को ऑयल इंडिया लिमिटेड का सहयोग प्राप्त था।

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